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फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी करने वाले सीओ बर्खास्त, अब वेतन वसूलेगी सरकार

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बिहार में फर्जी प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अधिकारियों पर सरकार ने अब शिकंजा कसना तेज कर दिया है। इसी कड़ी में एक बड़े खुलासे के बाद सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) प्रिंस राज को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं, सरकार अब उनसे अब तक मिले वेतन की वसूली की तैयारी भी कर रही है।
बताया जा रहा है कि भूमि एवं राजस्व विभाग में पारदर्शिता लाने के अभियान के तहत उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा लगातार नियुक्तियों की जांच करा रहे हैं। इसी जांच के दौरान प्रिंस राज के शैक्षणिक दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ी सामने आई। मामला उजागर होते ही विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से मुक्त कर दिया।
दो नाम, दो प्रमाण-पत्र — ऐसे खुला फर्जीवाड़ा
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, प्रिंस राज ने बिहार लोक सेवा आयोग की 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के समय वर्ष 2006 का मैट्रिक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था, जिसे मधुबनी के एक स्कूल से जारी बताया गया। लेकिन जांच में पता चला कि उन्होंने इससे पहले वर्ष 2004 में अलग नाम “धर्मेंद्र कुमार” से भी मैट्रिक परीक्षा पास की थी।
विशेष निगरानी इकाई की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि के साथ शैक्षणिक प्रमाण-पत्र तैयार किए गए थे। आरोप है कि 2006 का प्रमाण-पत्र जाली तरीके से बनवाकर उम्र और योग्यता साबित करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
बोर्ड की पुष्टि के बाद कार्रवाई
मामले ने निर्णायक मोड़ तब लिया जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 1 अगस्त 2025 को संबंधित अंकपत्र और प्रमाण-पत्र को फर्जी घोषित कर रद्द कर दिया। इसके बाद विभाग ने आयोग से राय ली और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।
प्रिंस राज की पहली पोस्टिंग पश्चिम चंपारण के चनपटिया में राजस्व अधिकारी के रूप में हुई थी। बाद में वे सुपौल सदर में अंचलाधिकारी बने।
वेतन की भी होगी रिकवरी
सरकार अब केवल बर्खास्तगी तक सीमित नहीं रहना चाहती। विभागीय सूत्रों के अनुसार, नौकरी के दौरान प्राप्त पूरे वेतन की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह कदम भविष्य में ऐसे मामलों पर कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का सख्त रुख
मंत्री विजय सिन्हा ने साफ कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में जालसाजी के लिए “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई गई है। उनके अनुसार, धोखाधड़ी से नौकरी पाने वाले अधिकारी जनता के साथ न्याय नहीं कर सकते, इसलिए ऐसे लोगों को प्रशासन में कोई जगह नहीं दी जाएगी।
आगे भी जारी रहेगी जांच
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों के प्रमाण-पत्रों की जांच का अभियान लगातार जारी रहेगा। यदि कहीं भी फर्जीवाड़ा पाया गया, तो न केवल नौकरी जाएगी बल्कि वेतन की रिकवरी और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
इस कार्रवाई को बिहार में सरकारी नियुक्तियों को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है।

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